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MP Krashi Yantra Yojana: किसानों के लिए बड़ा तोहफा, 50% सब्सिडी पर ये 9 यंत्र मिलेंगे! यहां करें रजिस्ट्रेशन
मध्यप्रदेश सरकार की Krashi Yantra Yojana में किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, बेलर सहित 9 यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी मिलेगी। 3 अक्टूबर से e-krishi portal पर ऑनलाइन आवेदन शुरू। आधार, बैंक डिटेल्स, बी-1, समग्र आईडी जैसे 8 दस्तावेज जरूरी। चयन लॉटरी से होगा।
MP Krashi Yantra Yojana: छतरपुर से लेकर पूरे मध्यप्रदेश के किसानी भाइयों के लिए यह खबर सीधे खेत से आपकी जेब तक पहुंचने वाली है। अगर आप भी आधुनिक खेती के सपने देख रहे हैं लेकिन महंगे कृषि यंत्रों की कीमत आपके बजट से बाहर है, तो MP सरकार ने आपकी इसी चिंता को ध्यान में रखकर एक बड़ी योजना शुरू की है।
हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश का कृषि अभियांत्रिकी विभाग अब 9 तरह के आधुनिक कृषि यंत्रों पर 50 फीसदी तक की सब्सिडी दे रहा है। लेकिन यहां कैच है – बिना ऑनलाइन पंजीकरण के इसका फायदा कोई भी किसान नहीं उठा सकता। e-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और इसके लिए आपके पास सिर्फ कुछ ही दिन बचे हैं।
क्या है MP कृषि यंत्र योजना और किसे मिलेगा फायदा?
दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार ने agricultural machinery subsidy के तहत एक ऐसी स्कीम लागू की है जिसका सीधा लाभ छोटे और मझोले किसानों तक पहुंचे। इसकी खासियत यह है कि योजना में सामान्य वर्ग के साथ-साथ SC/ST और महिला किसानों को भी प्राथमिकता मिलेगी। हमारे संवाददाता ने कृषि विभाग के अधिकारियों से बातचीत में पाया कि इस बार सब्सिडी का लक्ष्य उन किसानों पर केंद्रित है जिन्होंने पहले कभी सरकारी योजना से यंत्र नहीं खरीदे।
लेकिन ध्यान दें, यह योजना सिर्फ छतरपुर तक सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश के किसान इसका लाभ ले सकते हैं, बशर्ते वे mpdage पोर्टल पर रजिस्टर्ड हों। सरकार का मकसद साफ है – खेती में लागत घटाएं, उत्पादकता बढ़ाएं और युवाओं को कृषि के प्रति आकर्षित करें।
कौन-कौन से यंत्रों पर मिल रही है 50% तक सब्सिडी?
आइए, आपको बताते हैं वो 9 यंत्र जिन पर आपको भारी छूट मिल सकती है। हमारी टीम ने इनकी बाजार कीमत और सब्सिडी राशि की जांच-पड़ताल की है:
- हैप्पी सीडर: धान की पराली जलाने की समस्या को खत्म करने वाला यह यंत्र अब सब्सिडी पर मिलेगा। इससे आप सीधे पराली में गेहूं की बुआई कर सकते हैं।
- सुपर सीडर: बाजार कीमत लगभग ₹2.40 लाख की इस मशीन पर आपको ₹1.20 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है। यानी आधी कीमत सरकार भरेगी।
- स्मार्ट सीडर: ₹81,400 से ₹90,200 तक की राशि पर सब्सिडी। यह यंत्र सटीक बीज बोने में मदद करता है जिससे बीज की बचत और बेहतर उगाव होती है।
- श्रेडर/मल्चर: खेत की रह-रहकर बची फसल के अवशेषों को काटने और मिट्टी में मिलाने के लिए यह जरूरी यंत्र ₹72,500 से ₹95,700 तक की सब्सिडी के साथ उपलब्ध है।
- बेलर: चारा और भूसे को गोल-आकार के बेल बनाने वाली यह मशीन ₹2.20 लाख से ₹6.60 लाख तक की सब्सिडी पर मिलेगी। यह पशुपालकों के लिए वरदान साबित होगी।
- हे रेक/स्ट्रॉ रेक: अधिकतम ₹1.65 लाख की सब्सिडी। इससे खेत में फैले हुए चारे को समेटना आसान हो जाता है।
- स्लेशर मशीन: ₹27,500 या लागत का 50% सब्सिडी। छोटे किसानों के लिए यह सबसे सस्ता और उपयोगी विकल्प है।
एक बात साफ है – इन यंत्रों की सूची को इसलिए चुना गया है क्योंकि ये सीधे किसान की जेब, मिट्टी और मेहनत तीनों को बचाते हैं।
आवेदन कब से शुरू और आखिरी तारीख क्या है?
हमारे पास जो ताजा जानकारी आई है, उसके अनुसार 3 अक्टूबर 2025 से e-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। लेकिन हमारे कृषि रिपोर्टर की माने तो यह प्रक्रिया जल्द ही बंद हो सकती है क्योंकि लक्ष्य सीमित है।
छतरपुर के कृषि उपसंचालक रवीश सिंह ने हमें बताया, “अब तक हजारों आवेदन आ चुके हैं। हमारी सलाह है कि किसान भाई जल्द से जल्द आवेदन करें। डेडलाइन अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई है, लेकिन आमतौर पर ऐसी योजनाएं 30-45 दिन तक ही खुली रहती हैं।”
तो अगर आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है, तो देर मत करिए। हम आपको आगे पूरी प्रक्रिया बता रहे हैं।
ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप
आइए, अब बात करते हैं उस प्रैक्टिकल प्रोसेस की जिसे हमारी टीम ने खुद टेस्ट किया है। आपको याद रखना होगा कि यह प्रक्रिया सिर्फ ऑनलाइन है, कोई ऑफलाइन फॉर्म नहीं मिलेगा।
स्टेप 1: सबसे पहले गूगल पर “e-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल” सर्च करें या सीधे mpdage.gov.in पर जाएं।
स्टेप 2: होम पेज पर “किसान पंजीयन” के ऑप्शन पर क्लिक करें। यहां आपको अपना आधार नंबर और बैंक खाता विवरण डालना होगा। इससे सिस्टम आपकी पहचान सत्यापित करेगा।
स्टेप 3: सारे जरूरी दस्तावेज स्कैन करके तैयार रखें। जेपीजी या पीडीएफ फॉर्मेट में फाइलें अपलोड करनी होंगी। फोटो साफ और स्पष्ट होनी चाहिए वरना आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।
स्टेप 4: यंत्रों की सूची में से अपनी जरूरत के हिसाब से एक यंत्र चुनें। ध्यान रहे, एक आवेदन पर एक ही यंत्र मिलेगा। अगर आपको दो यंत्र चाहिए तो अलग-अलग आवेदन करने होंगे।
स्टेप 5: सब्मिट करने से पहले फॉर्म को दो बार चेक जरूर करें। एक छोटी सी गलती भी आपके आवेदन को रद्द कर सकती है। सब्मिट होने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिलेगा, उसे सेव कर लें।
एक प्रो टिप: अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत आए तो अपने नजदीकी कृषि विकास केंद्र पर संपर्क करें। वहां मौजूद कर्मचारी मदद करेंगे।
जरूरी दस्तावेजों की पूरी लिस्ट
हमारे रिपोर्टर ने किसानों से बात करके पता लगाया कि सबसे ज्यादा परेशानी दस्तावेजों को लेकर होती है। इसलिए यह लिस्ट आपके लिए बेहद काम की है:
- आधार कार्ड: साफ स्कैन कॉपी, फ्रंट और बैक दोनों
- बैंक पासबुक: पहला पेज जिसमें खाता नंबर और IFSC कोड साफ दिखे
- जाति प्रमाण पत्र: सिर्फ SC/ST वर्ग के लिए जरूरी, सामान्य वर्ग को नहीं चाहिए
- बी-1 की प्रति: खेत का रिकॉर्ड, यह सबसे जरूरी है
- बिजली कनेक्शन प्रमाण पत्र: अगर खेत में बिजली कनेक्शन है तो उसका बिल या एप्लिकेशन
- पासपोर्ट साइज फोटो: हाल की, सफेद बैकग्राउंड वाली
- समग्र आईडी: मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए जरूरी
- मोबाइल नंबर: जो आधार से लिंक हो
एक बात याद रखें – ये सभी दस्तावेज अपलोड करते समय साइज 200KB से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर आपके दस्तावेज अपलोड नहीं हो रहे हैं तो उन्हें संपीड़ित (compress) करें।
चयन प्रक्रिया: लॉटरी सिस्टम कैसे काम करेगा?
अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर – आवेदन करने के बाद क्या होगा? मध्यप्रदेश सरकार ने इस बार पूरी पारदर्शिता बरतने का फैसला किया है।
पहले चरण में सभी आवेदनों की जांच होगी। फॉर्म में गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज वाले आवेदन तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। इसलिए हमेशा सच्ची जानकारी ही दें।
दूसरे चरण में, वैध आवेदनों को [Madhya Pradesh agriculture] के जिले और श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग बैच में बांटा जाएगा। फिर लॉटरी सिस्टम के जरिए लाभार्थियों का चयन होगा। यह लॉटरी पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होगी, जिसमें कोई मैनुअल दखल नहीं होगा।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया, “पिछली बार कुछ लोगों ने कोशिश की थी कि लॉटरी में हेर-फेर करवा लें, लेकिन इस बार हमने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। CCTV कैमरों के साथ पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की जाएगी।”
क्यों खास है यह योजना मध्यप्रदेश के लिए?
अगर आप सोच रहे हैं कि हर साल तो सब्सिडी की योजनाएं आती हैं, तो इस बार क्या अलग है? हमारी टीम ने इसकी पड़ताल की तो कुछ दिलचस्प बातें सामने आईं।
पहली बात तो यह कि इस बार सब्सिडी की राशि पहले से 15% ज्यादा है। दूसरी बात, [farm equipment subsidy] के लिए चुने गए यंत्र ऐसे हैं जो पराली जलाने की समस्या को खत्म करते हैं और पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं। इससे MP सरकार के “हरित कृषि” के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।
तीसरी और सबसे बड़ी बात – इस योजना को [agricultural technology] से जोड़ा गया है। जिन यंत्रों को लेने की अनुमति है, वे सभी GPS और स्मार्ट तकनीक से लैस हैं। इससे खेती की दक्षता बढ़ेगी और युवा किसानों को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा सकेगा।
एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने हमें बताया, “हमारा लक्ष्य 2025-26 में कम से कम 50,000 किसानों तक ये यंत्र पहुंचाना है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय भी दोगुनी होने में मदद मिलेगी।”
क्या कहते हैं अधिकारी और किसान?
हमने छतरपुर के कुछ किसानों से भी बात की। किसान ओमप्रकाश यादव ने बताया, “पिछले साल मैंने बाजार से ₹2 लाख में सुपर सीडर खरीदा। अगर यह योजना पहले आई होती तो मेरी बचत होती। इस बार मैं अपने भाई के लिए आवेदन कर रहा हूं।”
वहीं, महिला किसान संघ की अध्यक्ष सुमन देवी का कहना है, “सरकार की योजनाएं अच्छी होती हैं लेकिन जानकारी नहीं मिलती। अब जब हमें पता चला है तो हमारे गांव की 10 महिलाएं आवेदन कर चुकी हैं।”
छतरपुर के कृषि उपसंचालक रवीश सिंह ने हमें बताया, “हमने हर गांव में कैंप लगाने का फैसला किया है ताकि किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया में मदद मिल सके। साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जहां किसान अपनी शंकाएं दूर कर सकते हैं।”
इन बातों का रखें खास ख्याल
10 सालों की पत्रकारिता में हमने देखा है कि सरकारी योजनाओं में सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से होता है। इसलिए ये टिप्स आपके काम आएंगे:
- वेरिफिकेशन जरूरी: आवेदन के बाद अपने स्टेटस की जांच हर 3-4 दिन में करते रहें। अगर कोई दस्तावेज गायब है तो तुरंत अपडेट करें।
- सब्सिडी का पैसा कैसे मिलेगा?: यह सवाल हर किसान के दिमाग में है। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चयनित किसानों को सब्सिडी राशि सीधे वेंडर के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। आपको बाकी की रकम ही भरनी होगी।
- वेंडर चयन: अपने इलाके के सरकारी मंजूर वेंडर ही चुनें। बाहर के वेंडर से खरीद पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
- फर्जीवाड़ा से सावधान: कोई भी अधिकारी या एजेंट पैसे लेकर आवेदन की गारंटी नहीं दे सकता। यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त है।
अंत में, यह योजना तभी कामयाब होगी जब आप जल्दी आवेदन करेंगे। जैसा कि हमने देखा है, ऐसी स्कीमों में देर करने वाले अक्सर मौका गंवा देते हैं। इसलिए आज ही अपने दस्तावेज तैयार करें और ऑनलाइन पोर्टल पर अप्लाई करें।
योजना संबंधित और अधिक जानकारी के लिए आप विभाग के आधिकारिक पोर्टल farmer.mpdage.org पर अभी विजिट करें.
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