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सोयाबीन भाव तेजी-मंदी रिपोर्ट : सोयाबीन बाजार में 5000 का आँकड़ा फिर ‘फिसला’ | किसानों को झटका!
सोयाबीन बाजार फँसा हुआ है—महाराष्ट्र में 5000 का आँकड़ा छूकर 4930 पर आया, MP में 4300-4500 की रेंज। स्टॉक 23% कम, लेकिन अमेरिकी डील का सस्पेंस और सरकारी खरीद में ढिलाई ने तेज़ी रोकी। किसानों को सलाह—ज़रूरत अनुसार कारोबार करें, बहुत स्टॉक न रखें।
Soybean Market Price: किसान साथियों, अगर आपने पिछले हफ्ते सोयाबीन बाजार पर नज़र रखी होगी, तो एक बात साफ़ दिखी होगी की 5000 का आँकड़ा बस एक ‘भ्रम’ बनकर रह गया है। महाराष्ट्र के कीर्ति प्लांट पर तो इसने हफ्ते भर में दो बार ‘झटका’ दिया, भाव 5000 को छुआ और फिर झटके से 4930 पर आ गया। ऐसा लग रहा है जैसे ये आँकड़ा एक ‘छलावा’ है जो बार-बार सामने आता है, लेकिन टिकता नहीं। आइए, आपको इसकी पूरी ‘इनसाइड स्टोरी’ बताते हैं।
क्या है सोयाबीन बाजार का ‘वेट एंड वॉच’ मोड?
अभी Soybean Market Price एक ‘अनोखी स्थिति’ में है। मांग और आपूर्ति दोनों ‘बिल्कुल बैलेंस’ में हैं, इसीलिए कोई बड़ी तेज़ी या मंदी नहीं आ रही। एक तरफ किसानों के पास स्टॉक ‘23% कम’ है पिछले साल की तुलना में, लेकिन दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में[Agricultural Commodities की मांग ‘सुस्त’ है। बस इसीलिए बाजार ‘अनिश्चितता’ में फँसा है। ट्रेडर भी यही सोच रहे हैं—’अब खरीदें या इंतज़ार करें?’ और इसी ‘डबल माइंडेडनेस’ ने बाजार को ‘वेट एंड वॉच’ मोड में धकेल दिया है।
महाराष्ट्र बनाम MP
महाराष्ट्र के किसान भाइयों को लग रहा है कि इस बार उत्पादन कम है तो भाव MSP से ऊपर जाएँगे ही, इसलिए वो अपनी फसल को ‘भंडार’ कर रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में स्थिति ‘बिल्कुल उल्टी’ है। यहाँ Commodity Market एक्सपर्ट की मानें, तो भाव पिछले एक हफ्ते से 4300-4500 की रेंज में फँसे हैं। भावांतर योजना के चलते बड़ी तेज़ी की ‘गुंजाइश’ कम ही दिख रही है। MP के व्यापारी कह रहे हैं, “50-100 रुपये की तेज़ी-मंदी के बीच ही सौदा होगा, इससे ज़्यादा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।”
अमेरिकी डील का ‘सस्पेंस’ और बाजार का भविष्य
भारत और अमेरिका के बीच Trade Deal अटकी हुई है, और इस महीने के ‘लास्ट तक’ कोई फैसला आने की उम्मीद है। अगर ये डील ‘फाइनल’ होती है और भारत ने Soybean Import किया, तो घरेलू बाजार में 200-300 रुपये की ‘भारी गिरावट’ आ सकती है। एक बड़े ट्रेडर्स ने हमसे कहा, “अभी तो ज़रूरत अनुसार ही खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। कोई बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहता।” इसीलिए बाजार एक रेंज फँसा है।
किसानों की रणनीति और सरकारी खरीद में ‘ढिलाई’
किसानों ने ‘स्टॉकिंग’ का रास्ता चुना है। वो MSP पर भी कम बेच रहे हैं, क्योंकि उन्हें Farmer Welfare की उम्मीद है। लेकिन सरकारी खरीद की ‘स्पीड’ बहुत धीमी है। केंद्र ने इस सीजन के लिए 18.50 लाख टन सोयाबीन खरीद को हरी झंडी तो दे दी है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर खरीद ‘सुस्त’ है। इससे मंडियों में आवक कमज़ोर हुई है, लेकिन कीमतें फिर भी नहीं उठ पा रहीं।
सोयामील निर्यात: उम्मीद की किरण या फिर ‘झूठा सहारा’?
Commodity Trading (India) के जानकारों की मानें, तो सोयामील निर्यात में ‘बम्प’ आया है। अक्टूबर में निर्यात 1.80 लाख टन हो गया, जो पिछले साल की तुलना में सवा गुना ज़्यादा है। कारण? अंतरराष्ट्रीय बाजार में Soybean Meal के भाव में मजबूती, जिसने भारतीय मील को ‘कॉम्पिटिटिव’ बना दिया। लेकिन CBOT पर पिछले एक महीने में 8% उछलने के बाद अब कीमतें ‘स्टेबल’ हैं, इसलिए यहाँ से बहुत बड़ी उम्मीद नहीं पालनी चाहिए।
इस हफ्ते क्या होगा? विशेषज्ञों की राय
हमने जो Agricultural Policy एक्सपर्ट्स से बात की, उनका कहना है कि इस हफ्ते भी 50-100 रुपये की ‘रेंज’ में ही उतार-चढ़ाव रहेगा। कीर्ति प्लांट पर भाव 4950-5000 के बीच ‘फ्लिप’ करेंगे, जबकि MP की मंडियों में 4600-4700 का ‘दायरा’ बना रहेगा। शनिवार को तो कीर्ति प्लांट पर भाव 4950 तक सुधर गए थे, लेकिन MP में भावांतर ने ‘लिमिट’ बाँध रखी है। सोया रिफाइंड तेल पर भी इसकी ‘मार’ पड़ी—MP में तो स्थिर रहा, लेकिन महाराष्ट्र में 1-2 रुपये प्रति किलो की ‘ढील’ दिखी।
क्या करें किसान और व्यापारी भाई?
अब सवाल ये है—खरीदें या बेचें? हमारी सलाह है, ‘बहुत ज़्यादा स्टॉक’ न रखें। ज़रूरत अनुसार Soybean Trade करें। अगर आपके पास ‘कैश’ की ज़रूरत है, तो मौका देखकर बेच दें। लेकिन अगर आप ‘रिस्क’ ले सकते हैं, तो अमेरिकी डील के फैसले तक थोड़ा इंतज़ार कर लें।
डिस्क्लेमर – दोस्तों ये रिपोर्ट हमने बाज़ार की हालिया स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार की है। यहाँ हम किसी भी प्रकार के व्यापार (ख़रीद-फ़रोत) की सलाह नहीं देते। इसलिए व्यापार अपने स्वयं के विवेक से करें।







