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गेहूं पर बड़ी खबर! जानिए कीमतों व देश की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर ?


Wheat Price News: दोस्तों, अगर आपको लगता है कि देश में बढ़ती महंगाई को लेकर मोदी सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, ऐसे में यदि आपने भी राहत की उम्मीद छोड़ दी है, तो सरकार के गेहूं-चावल के भंडारण को लेकर जारी ये ताजा आंकड़े शायद आपको कुछ राहत देंगे! जी हाँ ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार गेहूं और चावल के स्टॉक ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गेहूं और चावल के भंडारण से ना केवल आम आदमी के घर का रसोई बजट ठीक होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी । आइए आपको पूरा मामला विस्तार से समझाते है।

मुख्य बिन्दु

गेहूं के सरकारी स्टॉक में 57 फीसदी की वृद्धि

खाद्य निगम (FCI) के मुताबिक, इस साल गेहूं का सरकारी भंडार 11.8 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले 3 साल का सर्वोच्च स्तर है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि चालू सीजन 2025 के लिए सरकार ने 31 मिलियन टन खरीद लक्ष्य रखा है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजेश कपूर इस पर बात करते हुए कहा कि , “ये वृद्धि न सिर्फ उत्पादन में सुधार है , बल्कि किसानों के साथ सरकार के बेहतर समन्वय का नतीजा है।”

ताजा आकड़ो को देखें तो इसमें कोई दोराय नहीं की इस बार (2025) FCI की गेहूं खरीद की शुरुआती शानदार रही है। हालांकि, बाज़ार के जानकार ये भी चेतावनी दे रहे हैं की – “पिछले साल (2024) गेहूं की खरीद 26.6 मिलियन टन पर ही सिमट गई थी, इसलिए लक्ष्य के आकड़ों (31 मिलियन टन) को पाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना जरूरी हैं।”

कीमतों पर क्या पड़ेगा असर?

FCI द्वारा गेहूं खरीद के इन मजबूत आंकड़ों से कीमतों में स्थिरता आएगी। हालांकि आज 16 अप्रैल को देशभर की प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव मामूली तेजी के साथ सामान्य रहे। अधिकांश मंडियों में आज गेहूं के भाव क्वालिटी अनुसार 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल के बोले जा रहे है। सभी मंडियों के आज के गेहूं भाव आप यहां देख सकते है।

चावल का भंडार ख़रीद लक्ष्य से 4 गुना ज़्यादा

वहीं अगर चावल के भंडार की बात करे तो आपको सुनकर आश्चर्य होगा । सरकारी गोदामों में 63.09 मिलियन टन चावल और धान जमा हो चुका है, जो बफर स्टॉक लक्ष्य से 4 गुना अधिक है! यानी अगले दो साल तक देश को चावल के आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैसे तो भारत चावल का आयात नहीं करता क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है , लेकिन कई बार कुछ विकट परिस्थितियों में कुछ विशेष क़िस्मों के चावल का आयात करना पड़ जाता है।

क्या अब भारत को गेहूँ आयात नहीं करना पड़ेगा ?

बीते कुछ महीनों से गेहूं उत्पादन में गिरावट और आयात करने की अटकलों ने बाज़ार को हिला रखा था, मीडिया में जो खबरें सामने आ रही थी उनके मुताबिक़ कहा जा रहा था की 7 साल बाद पहली बार भारत को गेहूं आयात करना पड़ सकता है। लेकिन ताजा आंकड़े उन सभी खबरों पर पानी फेरता नज़र आ रहा हैं।

FCI के आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत अपनी मौजूदगी भी बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय गेहूं परिषद (IWC) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक मांग में 8% की बढ़ोतरी के बीच भारत के पास अच्छा मौका है।

महंगाई पर कितना लगेगा ब्रेक ?

पिछले दो साल में गेहूं और चावल की कीमतों में 20-25% की छलांग ने किसान और उपभोक्ता दोनों को परेशान किया था। लेकिन FCI के ये आंकड़े अब बाजार को नई दिशा देंगे । ई मंडी रेट्स से बात करते हुए व्यापारी मोहन अग्रवाल बताते हैं की , “जब सरकार के पास स्टॉक पर्याप्त मात्रा में होगा, तो बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा करना मुश्किल होगा। इससे खुदरा दामों में स्थिरता आएगी।” हालांकि, महंगाई पर कितना काबू पाया जा सकेगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा की सरकार गेहूँ का कितना भंडारण कर पाती है ।



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